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साहित्य के गांव में बाजार

(अभी हाल ही में ग्रामीण विषयवस्तु के दो लेखकों-अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। 'कौन बनेगा करोड़पति' में गांव के गरीबों को भागीदारी दी जा रही है। यह अनायास नहीं है। इसके पीछे गांव पर बाजार की पकड़ और पहुंच को मजबूत बनाने का सोचा समझा अभियान है। इसी मुद्दे पर ज्ञानरंजन ने 'साहित्य के गांव में बाजार' शीर्षक से एक विश्लेषण नागपुर से प्रकाशित लोकमत में पिछले दिनों किया। उनका विश्लेषण यहां प्रस्तुत है।)
मरकांत और श्रीलाल शुक्ल विशुद्ध रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमियों में प्रचुर लेखन करने वाले कथाकार नहीं हैं। यद्यपि अमरकांत ग्रामीण इलाके से ही शहर में आए, जिस तरह हिन्दी में अनेक रचनाकार आए हैं। प्रेमचंद, शिवपूजन सहाय, जगदीश चंद्र, फणीश्वरनाथ रेणु, राही मासूम रजा, मार्कंडेय, शिवमूर्ति और हरनोट आदि कथाकारों की तरह अमरकांत ग्रामीण लेखन के रचनाकार नहीं हैं। उन्हें हम प्रेमचंद की कहानी की परंपरा को अग्रसर करने वाले कहानीकार अवश्य मान सकते हैं।
अमरकांत की राह- 1950 अथवा आजादी के बाद इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, आगरा, बलिया आदि उत्तरप्रदेश के शहर इस तरह के…