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December, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विचारोत्तेजक प्रस्तुतियों के कारण याद रखा जाएगा विवेचना नाट्य समारोह

जबलपुर में विवेचना 15 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह छह नाटकों के मंचन के साथ ही कुछ समकालीन सवालों के साथ समाप्त हो गया। इस बार के नाट्य समारोह में मुंबई की अरण्य ने शक्कर के पांच दाने व इलहाम, नई दिल्ली की अस्मिता ने अनसुनी व आपरेशन थ्री स्टार और भोपाल के नट बुंदेले ने चारपाई और विवेचना ने सूपना का सपना नाटक की प्रस्तुति की। पिछले 15 वर्षों में विवेचना का प्रत्येक नाट्य समारोह किसी न किसी विशेषता के कारण पहचाना जाता रहा है। कभी संगीतमयी प्रस्तुति के कारण, तो कभी महिला संबंधी मुद्दों के कारण और कभी मुंबई के हास्य नाटकों के मंचन के कारण। इस बार के नाट्य समारोह में गंभीर, दुखद और समकालीन विषयों पर आधारित नाटकों के मंचन से इसे विचारोत्तेजक प्रस्तुतियों के कारण याद रखा जाएगा।
नाट्य समारोह के छह नाटकों को देखने दर्शक तो खूब आए, लेकिन कुछ प्रस्तुतियां ऐसी रहीं जो उन्हें प्रभावित नहीं कर पाईं। इसका सबसे बड़ा कारण नाटकों के दार्शनिक विषय थे। इनमें मुंबई की अरण्य रंग संस्था के शक्कर के पांच दाने और इलहाम जैसे नाटक थे। इन प्रस्तुतियों को देख कर महसूस हुआ कि दर्शकों को यदि रंगमंच से जोड़ना है, तो उनकी…

जबलपुर की पहचान ‘पहल’ को 35 वर्षों के पश्चात् बंद करने का निर्णय

हिंदी साहित्य जगत की अनिवार्य पत्रिका के रूप में मान्य पहल को उसके संपादक ज्ञानरंजन ने 35 वर्ष के लगातार प्रकाशन के पश्चात् बंद करने का निर्णय लिया है। पहल का 90 वां अंक इसका आखिरी अंक होगा। पहल जबलपुर की एक पहचान भी थी। पूरे देश में लोग भेड़ाघाट के साथ जबलपुर को पहल के कारण भी पहचानते थे। जबलपुर जैसे मध्यम शहर से पहल जैसी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका निकली और इसने विश्व स्तर को प्राप्त किया। ज्ञानरंजन ने पहल को किसी आर्थिक दबाव या रचनात्मक संकट के कारण बंद नहीं किया है, बल्कि उनका कहना है-‘‘पत्रिका का ग्राफ निरंतर बढ़ना चाहिए। वह यदि सुन्दर होने के पश्चात् भी यदि रूका हुआ है तो ऐसे समय निर्णायक मोड़ भी जरूरी है।’’ उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि यथास्थिति को तोड़ना आवश्यक हो गया है। नई कल्पना, नया स्वप्न, तकनीक, आर्थिक परिदृश्य, साहित्य, भाषा के समग्र परिवर्तन को देखते हुए इस प्रकार का निर्णय लेना जरूरी हो गया था। वे कहते हैं कि इस अंधेरे समय में न्यू राइटिंग को पहचानना जरूरी हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं करना भी बेईमानी होगी। ज्ञानरंजन कहते हैं कि विकास की चुनौती और शीर्ष पर पहल को बंद करने का निर…