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रघुवीर यादव की न्यूटन से जबलपुर की आस आस्कर अवार्ड से जुड़ी

रघुवीर यादव की न्यूटन फिल्म से जबलपुर आस्कर अवार्ड से जुड़ गया है। न्यूटन इस वर्ष आस्कर अवार्ड के लिए भारत की अध‍िकारिक प्रव‍िष्ट‍ि है। रघुवीर यादव की इस फ‍िल्म से भारत ही नहीं बल्क‍ि जबलपुर की आस भी आस्कर अवार्ड से जुड़ गई है। जबलपुर के मूल निवासी रघुवीर यादव प्रत्येक वर्ष दीपावली पर यहां करौंदी स्थि‍त घर में आते हैं, लेकिन इस वर्ष वे दीपावली में स‍िक्क‍िम में थे। मुंबई से उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस वर्ष न्यूटन आस्कर अवार्ड में भारत के लि‍ए उपलब्ध‍ि हासि‍ल करेगी और भारतीय फिल्म उद्योग के लिए नए अध्याय की शुरूआत होगी। रघुवीर यादव ने कहा कि अब कंटेंट बेस्ड सि‍नेमा ही पनपेगा। अमित मसुरकर निर्देशि‍त न्यूटन एक ब्लेक कॉमेडी फिल्म है, जो भारतीय चुनाव प्रणाली पर कड़क व्यंग्य कसती है। न्यूटन की सफलता पर रघुवीर यादव ने कहा कि स्टारों की फिल्में असफल हो रही हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि आप हर समय दर्शकों को बेवकूफ नहीं बना सकते। दर्शक अब बुद्धि‍मान है, वह अच्छी व बुरी फिल्म में अंतर करने लगा है।         रघुवीर यादव एक फिल्म अभ‍िनेता, एक थ‍ि‍एटर आर्टिस्ट, एक गायक,…
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जबलपुर की हॉकी और ओलंपिक का 88 वर्ष पुराना है रिश्ता

पश्चि‍म मध्य रेल जबलपुर की महिला हॉकी ख‍िलाड़ी सुनीता लाकड़ा को रियो ओलंपिक में भाग लेने वाली की भारत की महिला हॉकी टीम में शामिल करने से हॉकी जगत में खुशी की लहर फैल गई है। जबलपुर और ओलंपिक का रिश्ता फिर एक बार जुड़ने जा रहा है। जबलपुर देश का सबसे पुराना हॉकी का गढ़ रहा है। जबलपुर में हॉकी को परिचित करवाने का श्रेय ब्रिटिश ऑर्मी है। 19 वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश ऑर्मी ने हॉकी से स्थानीय नागरिकों को परिचित करवाने के पश्चात् भारतीय व एंग्लो-इंडियन समाज ने हॉकी खेलने की शुरूआत की। ओल्ड राबर्टसन कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य सर हेनरी शार्प ने 1894 में हॉकी को व्यवस्थि‍त रूप दिया। सन् 1900 में दो क्लब बनाए गए। सिटी स्पोर्ट्स व केंटोमेंट स्पोर्ट्स हॉकी क्लब के पश्चात् 20 वीं श्ताब्दी की शुरूआत के पहले दशक में पुलिस विभाग ने हॉकी को अपनाया। उस समय जबलपुर में ऑर्मी की दो प्रसिद्ध बटॉलियन 33 पंजाबीस् व फर्स्ट ब्राम्हण का डेरा जबलपुर में था और इनका नेतृत्व मेजर फेल्ट एवं सूबेदार बाले तिवारी कर रहे थे। याद रहे कि बाले तिवारी हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के गुरू थे। ध्यानचंद के अनुज रूप सिंह का जन्…

डा. संदीप जैन कैमराडिरी फोटोग्राफी काम्पीटिशन में अवार्ड आफ एक्सीलेंस से सम्मानित

बलपुर के सुप्रसिद्ध र्इएनटी चिकित्सक  डा. संदीप जैन को आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक http://www.cameraderie.co.in द्धारा आयोजित कैमराडिरी फोटोग्राफी काम्पीटिशन-2013 में अम्योचर (शौकिया) श्रेणी में उनकी फोटो प्रविष्टि लाइन्स आफ विजडम के लिए जूरी च्वाइस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। पिछले दिनों मुंबर्इ में आयोजित एक भव्य समारोह में आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक की प्रबंध संचालक व सीर्इओ चंदा कोचर, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव सभरवाल और के. रामकुमार ने डा. संदीप जैन को सिल्वर अवार्ड आफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया। डा. संदीप जैन वेस्टर्न जोन में विजेता रहे और पुरस्कृत होने वाले छायाकारों में वे मध्यप्रदेश से एकमात्र छायाकार थे। डा. जैन की प्रविष्टि को जूरी ने 16 सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि में भी चयनित किया।
कैमराडिरी फोटोग्राफी काम्पीटिशन में देश भर से 8700 छायाकारों ने भाग लिया था और इसमें कुल 11,000 से ज्यादा फोटो प्रविष्टियां प्राप्त हुर्इ थीं। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छायाकारों को अपनी प्रविष्टि आन-लाइन प्रेषित करनी थी। प्रतियोगिता के निर्णायक ओग्लिवी एंड मेथर (ओएंडएम) एडवरटाइजिंग एजेंसी साउथ एशिया…

विवेचना रंगमंडल राष्ट्रीय नाट्‌य समारोह: विविधताओं से भरा हुआ रंग परसार्इ-2013

बलपुर की विवेचना रंगमंडल ने पिछले दिनों पांच दिवसीय रंग परसार्इ-2013 राष्ट्रीय नाट्‌य समारोह का आयोजन स्थानीय प्रेक्षागृह शहीद स्मारक में किया। इस बार का नाट्‌य समारोह प्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षाविद, पत्रकार और पूर्व मेयर रामेश्वर प्रसाद गुरू को समर्पित था। विवेचना की स्थापना वर्ष 1961 में हुर्इ थी और संस्था ने 1975 से नुक्कड़ नाटकों के प्रदर्शन से अपनी रंग यात्रा की शुरूआत की, जो आज तक जारी है। देश में विवेचना रंगमंडल की पहचान एक सक्रिय सरोकार से जुड़ी हुर्इ रंगकर्म संस्था के रूप में है। विवेचना प्रत्येक वर्ष नाट्‌य समारोह में नए निर्देशकों को मौका दे रही है। इस बार के नाट्‌य समारोह में भी नए नाट्‌य निर्देशक को मौका दिया गया। इस प्रयास को रंगकर्मियों के साथ-साथ दर्शकों ने भी सराहा। नाट्‌य समारेाह में मध्यप्रदेश नाट्‌य स्कूल के निदेशक संजय उपाध्याय को रंगकर्म में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए 21 हजार रूपए की राशि भेंट कर सम्मानित किया गया।
पांच दिवसीय नाट्‌य समारोह में निर्माण कला मंच पटना ने संजय उपाध्याय के निर्देशन में कंपनी उस्ताद, अलंकार थिएटर ग्रुप चंडीगढ़ ने चक्रेश कुमार के निर…

पीवी राजगोपाल को अन्ना हजारे से अलग, स्वयं का अस्तित्व बनाए रखने की सलाह

केरल में जन्मे गांधीवादी कार्यकर्ता पीवी राजगोपाल गांधी शांति प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष और एकता परिषद के प्रमुख हैं . एकता परिषद की स्थापना वर्ष १९९१ में की गई थी . राजगोपाल ने वर्धा स्थित सेवाग्राम से कृषि का अध्ययन करने के बाद ७० के दशक में चंबल के डाकुओं के समर्पण और पुनर्वास में सक्रिय भूमिका निभाई . कथकली का नृत्य का प्रशिक्षण ले चुके राजगोपाल की पत्नी कनाडा मूल की जिल कार हैरिस हैं. जिल कार हेरिस भारत भ्रमण के साथ साथ सहकारिता , आदिवासी उत्पीडन और जल -जंगल - ज़मीन से जुड़े मामलों के अध्यन के लिए आईं थी . पी वी राजगोपाल के साथ इन क्षेत्रों में काम करते उन्हें लगा कि राजगोपाल अपने आंदोलन के प्रति तन मन से ईमानदार हैं , तभी उन्होंने राजगोपाल की जीवन संगिनी बनने का फैसला किया और तभी से वे उतनी ही ईमानदारी से राजगोपाल के हर कदम पर उनके साथ रहती हैं.  राजगोपाल के मुताबिक एकता परिषद एक अहिंसक सामाजिक आंदोलन है, जो राष्ट्रीय स्तर पर गरीब और भूमिहीन लोगों के लिए भूमि अधिकारों की मांग कर रहा है। भूमि सुधार वन अधिकारों की मांग को ले कर राजगोपाल ने २००७ में भी ग्वालियर से दिल्ली तक २५ हजार लो…

जे. सी. जोशी पंचम शब्द साधक साहित्य सम्मान एवं पाखी महोत्सव-2012: ज्ञानरंजन ने कहा- यह पुरस्कार राजपथ से जनपथ की तरफ जाने जैसा है

(प्रसिद्ध कहानीकार और पहल के संपादक ज्ञानरंजन को 25 अगस्त को जबलपुर में जे. सी. जोशी पंचम शब्द साधक साहित्य सम्मान एवं पाखी महोत्सव-2012 में शब्द साधक शिखर सम्मान से सम्मानित किया। समारोह में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार शेखर जोशी ने ज्ञानरंजन को 51 हजार रूपए की सम्मान राशि भेंट की। समारोह की अध्यक्षता नर्मदा यायावर, लेखक व कलाकार अमृतलाल बेगड़ ने की। इस अवसर पर ज्ञानरंजन ने अपने चिरपरिचित अंदाज में वक्तव्य दिया। उनका वक्तव्य यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत है) :-

माननीय अध्यक्ष नर्मदा के अविराम यात्री-सर्जक श्री बेगड़ जी, शेखर भाई, अपूर्व जोशी और मंचासीन आयोजक रचनाकार साथियों

    सभागार में बाहर से आए मेरे अनेक मित्र, कथाकार, कवि, कार्यकर्त्ता और स्थानीय नागरिक जीवन के नए-पुराने साथी बैठे हैं। प्यार करने वाले लोग हैं, तरह-तरह के जीवन साथी हैं, कुछ पुराने विद्यार्थी भी हैं। समझिए कि एक छोटा सा तारामंडल ही है। यह पहला सम्मान अथवा पुरस्कार है, जो मेरे गृह नगर में दिया गया, अन्यथा बाकी सभी दूर जगहों में ही दिए गए। इसी शहर में 50 वर्ष का मेरा जीवन बिखर गया है, जिसमें शानदार लोग रहते आए थे। इसलिए …

पहल : संवाद – 2

मित्रों, आप लोगों की निरंतर आती हुई शुभकामनाओं, अपूर्व उत्साह और सहकारी बनने की अभिव्यक्तियों ने हमें हैरानी की हद तक ख़ुश और तैयार किया है. कई बार यह होता है कि जहां हम नहीं हैं वहां भी हमारी सोच और कर्म की छाया पहंच चुकी होती है. ‘पहल’ के प्रसंग में भी यही हुआ. हम पहली बार इस माध्यम का उपयोग कर रहे हैं. जिन्हें उम्मीद थी या प्रतीक्षा में थे, हमारे पुराने और बिल्कुल नये साथी, वे अपनी प्रतिक्रियाओं से ‘पहल’ के भविष्य का एक स्पष्ट संकेत तो दे ही रहे हैं. वस्तुत: प्रेरणाएं सो नहीं गई थीं, हमीं निद्रा में चले गए थे. हमे जगाने के लिए धन्यवाद. मित्रों, जब हम आपसे प्रत्यक्षत: मुखातिब नहीं हों तब भी, यकीन जानिये, हम दिन-रात प्रारंभिक तैयारियों में लगे हैं. क्रमश: उदबोधन की भाषा की ज़रूरत कमतर होगी और हम ठोस सूचनाओं और कामकाजी अभियान की तरफ बढ़ेंगे. आपसे आग्रह है कि बधाई की जगह अब हमें अपने आवासीय पत्ते, टेलीफोन नम्बर जैसी जानकारियां, हमारे ईमेल – gyanranjanpahal@gmail.com  और rkpahal2@gmail.com  पर हमें भेज दें. आप ‘पहल’ की बिक्री, प्रसार, उसकी रचनात्मकता और उसके आर्थिक उपायों के …