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August, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

व्यंग्य को विधा नहीं स्पिरिट मानते थे हरिशंकर परसाई

(22 अगस्त को प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई का जन्मदिवस था। इस दिन जबलपुर की संस्थाओं विवेचना, प्रगतिशील लेखक संघ, कहानी मंच और साहित्य सहचर ने परसाई को याद किया। एक कार्यक्रम में कवि मलय और कहानीकार राजेन्द्र दानी ने परसाई और उनके रचनाकर्म को विश्लेषित किया। राजेन्द्र दानी ने इस अवसर पर एक लिखित वक्तव्य दिया। यह वक्तव्य आज के संदर्भ काफी महत्वपूर्ण है। राजेन्द्र दानी के इस
वक्तव्य को यहां प्रस्तुत किया जा रहा है।)
आज स्वर्गीय हरिशंकर परसाई को इस उपलक्ष्य में याद करने का अर्थ बेहद व्यापक है और अत्यधिक प्रासंगिक भी। परसाई जी अपने समय में जिन व्यापक मानव मूल्यों की पक्षधरता के लिए संघर्ष करते रहे, इस दौर में उनका जितना विघटन देखने मिल रहा है, संभवत: इसके पहले नहीं था। इस अभूतपूर्व समय में उनके रचनाकर्म की प्रासंगिकता को जिस अर्थ में लिया जाना चाहिए, उसका दायित्व निर्वहन हमारे समय के साहित्य अध्येता नहीं कर रहे हैं। यह एक बड़े अफसोस की बात है। यह इसलिए कि उनके अपने संघर्षों को लेकर उनके अपने विश्वास थे। जो उनके अपने जीवन के आगे बढ़ते-बढ़ते दृढ़ से दृढ़तर होते चले गए। इन विश्वासों को उन्होंने…

चंद सिक्कों की खातिर.......जान जोखिम में डाल दिन भर नर्मदा के घाट पर घूमते हैं मासूम

# नितिन पटेल

वह उम्र जिसमें बच्चे मां-बाप की अंगुली थामकर चलना सीखते हैं, उस उम्र में कुछ मासूम चंद सिक्कों की खातिर दिन भर जबलपुर के तिलवाराघाट की खाक छानते रहते हैं। तिलवाराघाट नर्मदा नदी के एक प्रसिद्ध घाट के रूप में पहचाना जाता है। अपनी जान जोखिम में डालकर ये बच्चे रस्सी में चुम्बक बांधकर उन सिक्कों की तलाश में अपना बचपन गंवा रहे हैं, जिन्हें श्रद्धालु आस्था में घाट में फेकते हैं। मासूमों को इस उम्र में कमाई के लिए भेज देने वाले अभिभावकों के साथ लगता है प्रशासन और पुलिस को भी कोई सरोकार नहीं है। बच्चे स्वयं बताते हैं कि आज तक उन्हें इस कार्य करने से किसी ने नहीं रोका।
कभी-कभी कुछ नहीं मिलता तिलवाराघाट के पास ही रहने वाले 8 वर्षीय प्रकाश बर्मन, 7 वर्षीय सागर, संदीप, सन्नी और अन्य बच्चों ने बताया कि अब उन्हें यह काम अच्छा लगने लगा है। उन्होंने बताया कि कभी-कभी तो उन्हें कुछ सिक्के मिल जाते हैं, जबकि कभी-कभी एक भी सिक्का नहीं मिलता। कुछ बच्चों ने बताया कि वे अपनी खुशी से आते हैं, जबकि कुछ ने बताया कि उनके माता-पिता उन्हें यहां भेजते हैं। बच्चों का बचपन किस हद तक खत्म हो चुका है, इसकी ब…