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विख्यात साहित्यकार ज्ञानरंजन को भारतीय भाषा परिषद का प्रतिष्ठित साधना सम्मान

हिंदी के विख्यात साहित्यकार और पहल के संपादक ज्ञानरंजन को हिंदी साहित्य में अमूल्य योगदान देने के लिए भारतीय भाषा परिषद ने वर्ष 2008 के साधना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। साधना सम्मान के रूप में ज्ञानरंजन को कोलकाता में 18 अप्रैल को एक भव्य समारोह में 51,000 रूपए की सम्मान निधि और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाएगा। ज्ञानरंजन के अलावा तमिल साहित्य के लिए वेरामुत्थु, उड़िया साहित्य के लिए रामचंद्र बेहरा और पंजाबी साहित्य के लिए डा. महेन्द्र कौर गिल को भी सम्मानित किया जाएगा। सुप्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी चारों साहित्यकारों को सम्मानित करेंगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय भाषा परिषद एक प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था है और पिछले 35 वर्षों से भारतीय भाषा के साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत है। परिषद द्वारा हिंदी में मासिक पत्रिका वागार्थ का प्रकाशन भी लंबे समय से किया जा रहा है। परिषद ने विभिन्न भाषाओं के चार युवा साहित्यकारों को भी युवा पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। निर्मला पुतुल को संथाली भाषा के लिए, अल्पना मिश्रा को हिंदी, एस. श्रीराम को तमिल और मधुमित बावा को पंजाबी भाषा के साहित्य में योगदान देने के लिए युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

टिप्पणियाँ

संगीता पुरी ने कहा…
सबों को बधाई एवं शुभकामनाएं।
Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…
भाई गुलुश जी
अभिवंदन.
आदरणीय ज्ञानरंजन जी को भारतीय भाषा परिषद् का साधना सम्मान प्राप्त होना निश्चित रूप से संस्कारधानी के लिए ये बड़े गर्व कि बात है, हमारी भी हार्दिक बधाई सम्माननीय ज्ञान रंजन जी को प्रेषित करें . हम अन्य वरिष्ट और युवा साहित्यकारों को भी बधाई देते हैं जिन्हें भारतीय भाषा परिषद् सम्मानित करने जा रही है.

हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर: ज्ञानरंजन जी को साधना सम्मान#links#links
- विजय
prahlad ने कहा…
bhaiya bahut din se nai post nahi daali hai kya bat hai
koi khash vajah hai kya

apka blog reader
prahlad mandal
jabalpur se

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