सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मौत का कुआं न बने स्वीमिंग पूल


जबलपुर में बिजली बोर्ड के इंजीनियर अभिषेक जैन और उनकी पत्नी श्रीमती रीना जैन को 2 अप्रैल 2007 का दिन भुलाए नहीं भूलता है। इस दिन उनके लाड़ले आशय की मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल के स्वीमिंग पूल में डूबने से मृत्यु हो गई थी। इस वर्ष 2 अप्रैल को आशय की स्मृति में अभिषेक और रीना जैन ने स्थानीय समाचार पत्रों में एक जनहित में विज्ञापन जारी किया। इस विज्ञापन का उद्देश्य उन अभिभावकों को सतर्क करना है, जिनके बच्चे स्वीमिंग पूल में तैरने जाते हैं। जैन दंपति ने विज्ञापन में अभिभावकों को आगाह किया कि वे बच्चों को स्वीमिंग पूल में जाने से पूर्व स्पोटर्स अथॉरिटी आफ इंडिया से प्रशिक्षित तैराकी कोच, प्रशिक्षित मेडिकल अटैण्डेंट एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा व्यवस्थाएं जैसे लाइफबॉय, लाइफ जैकेट, श्वसन उपकरण, आक्सीजन सिलेंडर, जीवन रक्षक निर्देश चार्ट तथा उपयुक्त संचार एवं प्रकाश व्यवस्था जैसी तथ्यों की पुष्टि आवश्यक रुप से कर लें।
जैन दंपति कहती है कि सुरक्षा के अभाव में सुविधाएं भी जानलेवा बन जाती हैं। दिल्ली पुलिस हर वर्ष स्वीमिंग पूलों में अपनाई जाने वाली सुरक्षा को ले कर पोस्टर अभियान चलाती है। दिल्ली पुलिस की तर्ज पर जबलपुर में भी इंजीनियर अभिषेक जैन और उनके मित्र पोस्टर अभियान चला रहे हैं। स्वीमिंग पूलों और स्कूलों में लगाए गए पोस्टरों में स्वीमिंग पूल में अपनाई जाने वाली सुरक्षा की जानकारी दी गई है।
अभिषेक-रीना जैन कहते हैं- "आशय का विछोह हमारे लिए आजीवन त्रासदी है। गत एक वर्ष से हमने पुलिस, प्रशासन एवं जन प्रतिनिधियों से स्वीमिंग पूल में सुरक्षा मानकों को लागू करने की गुहार की है। हम न तो किसी के खिलाफ बदले की कार्रवाई चाहते हैं, न कोई मुआवजा। जो हमने खोया है, उसकी कोई क्षतिपूर्ति संभव नहीं है। हम चाहते हैं कि ऐसी त्रासदी किसी और माता-पिता को न भोगनी पड़े। हमारा सभी से अनुरोध है कि स्वीमिंग पूल बच्चों के लिए मौत का कुआं न बने, यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें।"
जैन दंपति के जन-जागरण के पश्चात् भी जबलपुर के स्वीमिंग पूलों में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और न ही निर्धारित मानक के अनुसार व्यवस्था की गई। स्वीमिंग पूलों में प्रशिक्षित तैराकी कोच, लाइफ जैकेट, रिसरेक्टर पम्प, आक्सीजन सिलेंडर, लाइफबॉय आदि का अभाव है। कोई यह तक देखने वाला नहीं है कि पानी में खतरनाक क्लोरिन की मात्रा कितनी है। सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।
पानी में क्लोरिन खतरनाक- स्वीमिंग पूल के पानी में क्लोरिन अधिक होने पर आंखों में जलन, फेफड़ों में सूजन, विशेष परिस्थितियों में श्वसन तंत्र में रुकावट और अर्द्धमूर्छा की स्थिति बनती है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने वर्ष 2006 में मुंबई के 32 स्वीमिंग पूल के सेंपल लिए थे। उनमें से 27 में क्लोरिन की मात्रा निर्धारित मापदंड से ज्यादा पाई गई। कुछ प्रकरणों में यह मात्रा 8 से 10 गुना तक ज्यादा पाई गई। चौंकाने वाली बात यह है कि ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड ने स्वीमिंग पूल के पानी के मानक स्तर के लिए 1993 में आईएस-3328 कोड जारी किया। 90 प्रतिशत से अधिक स्वीमिंग पूल संचालकों को इस कोड की जानकारी नहीं है। इसी तरह बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि स्वीमिंग पूल में कम से कम प्रति व्यक्ति 20 वर्ग फुट पूल एरिया होना चाहिए। स्वीमिंग पूल में लाइटिंग, टेलीफोन, हॉस्पिटल और एम्बुलेंस के फोन नंबर होना चाहिए।
लायसेंस की अनिवार्यता जरुरी- मध्यप्रदेश में अभी तक स्वीमिंग पूल चलाने के लिए लायसेंस की अनिवार्यता लागू नहीं की गई है। दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2004 से स्वीमिंग पूल संचालकों के लिए लायसेंस अनिवार्य कर दिया है। लायसेंस के लिए महानगर पालिका को स्पोटर्स अथॉरिटी के द्वारा प्रमाणित तैराकी प्रशिक्षक, पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट एवं सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता का प्रमाण पत्र देना पड़ता है। लायसेंस अनिवार्य होने के बाद दुर्घटना में काफी कमी आई है। इसी तरह जयपुर में भी स्वीमिंग पूल में के लिए लायसेंस जरुरी किया गया है। स्वीमिंग पूल निर्माण के लिए मॉडल बिल्डिंग कोड में मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके बावजूद अधिकांश नगर निगम एवं राज्य सरकार इसकी अनदेखी कर रही हैं।

टिप्पणियाँ

mahendra mishra jabalapur ने कहा…
मध्यप्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह स्वीमिंग पूल चलाने के लिए लायसेंस की अनिवार्यता लागू की जाना चाहिए . मैं आपके विचारो से सहमत हूँ . आभारी हूँ
Udan Tashtari ने कहा…
बिल्कुल सही कह रहे हैं, इसे एक जन अभियान की तरह लिया जाना चाहिये प्रशासनिक स्तर पर.
yaksh ने कहा…
सुरक्षा मापदंडो से अपूर्ण पूल में पैर भी न रखें।प्रशासन स्तर पर लायसेंस देनें के बाद भी नियमित जाँच की जाए,व्यक्तिगत रुप से जागरुक होना आवश्यक हैं।ध्यानाकर्षण हेंतु धन्यवाद!

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विवेचना रंगमण्डल राष्ट्रीय नाट्य समारोह-2010: उत्कृष्ट रंगकर्म को दर्शकों का समर्थन

जबलपुर की विवेचना रंगमण्डल ने पिछले दिनों सात दिवसीय ‘रंग परसाई-2010 राष्ट्रीय नाट्य समारोह’ का आयोजन जबलपुर के मानस भवन में किया। यह नाट्य समारोह रंगकर्मी संजय खन्ना को समर्पित था। विवेचना की स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी और संस्था ने 1975 से नुक्कड़ नाटकों के प्रदर्शन से अपनी रंग यात्रा की शुरूआत की, जो आज तक जारी है। देश में विवेचना रंगमण्डल की पहचान एक सक्रिय सरोकार से जुड़ी हुई रंगकर्म संस्था के रूप में है। विवेचना रंगमण्डल पिछले कुछ वर्षों से नए निर्देशकों की नाट्य प्रस्तुतियों को राष्ट्रीय समारोह में भी मौका दे रही है। इस बार के नाट्य समारोह में भी जबलपुर में आयोजित अंतर महाविद्यालयीन नाट्य प्रतियोगिता की तीन श्रेष्ठ नाट्य प्रस्तुतियों को मौका दिया गया, ताकि दर्शकों को नया रंगकर्म देखने का अवसर मिल सके। इस प्रयास को रंगकर्मियों के साथ-साथ दर्शकों ने भी सराहा। इस बार के नाट्य समारोह की एक खास बात यह भी रही कि दर्शकों को सात दिन में नौ नाटक देखने को मिले। समारोह की शुरूआत और अंत गंभीर और विचारोत्तेजक नाटकों से हुआ एवं अन्य दिन हास्य नाटकों के साथ नौटंकी भी देखने को मिली।
नाट्य समारो…

जबलपुर में कविता पोस्टरों की प्रदर्शनी, काव्य पाठ और कला व्याख्यान पर केन्द्रित दो दिवसीय 'दृश्य और श्रव्य' कार्यक्रम आयोजित

प्रगतिशील लेखक संघ, विवेचना, विवेचना रंगमंडल और सुर-पराग के तत्वावधान में पिछले दिनों (१३-१४ मार्च को) जबलपुर में दो दिवसीय 'दृश्य और श्रव्य' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पिछले दो दशक के हिंदी के श्रेष्ठ कवियों राजेश जोशी, वीरेन डंगवाल और राजकुमार केसवानी का काव्य पाठ, कविताओं की पोस्टर कला कृतियों की नुमाइश और विखयात विश्वविखयात चित्रकार एवं कथाकार अशोक भौमिक का व्याख्यान हुआ। दो दिवसीय दृश्य और श्रव्य कार्यक्रम का आयोजन इस मायने में महत्वपूर्ण रहा कि इसमें जबलपुर के साहित्यकारों, लेखकों, चित्रकारों, रंगकर्मियों के साथ आम लोगों खासतौर से महिलाओं की बड़ी संखया में सहभागिता रही। दो दिन तक जबलपुर के साहित्य और कला प्रेमियों ने अपनी शाम स्थानीय रानी दुर्गावती संग्रहालय की कला वीथिका में विचारोत्तेजक कविता पाठ सुनने के साथ कविताओं की पोस्टर कला कृतियां देखने में गुजारी। अशोक भौमिक द्वारा 'समकालीन भारतीय चित्रकला में जनवादी प्रवृत्तियां' विषय पर पावर पाइंट प्रस्तुतिकरण के साथ दिया गया व्याख्यान कला प्रेमियों के साथ-साथ कला से वास्ता न रखने वाले आम लोगों के ल…

प्रतिरोध को थिएटर का माध्यम बनाने वाले रंगकर्मी बादल सरकार

बादल सरकार का नाम देश में नाटक का पर्याय है। कलकत्ता में जन्में बादल सरकार ने कई वर्ष इंजीनियर के रूप में काम किया। विदेश से रंगकर्म का डिप्लोमा लेने के पश्चात् उन्होंने रंग जगत में प्रवेश किया। उनके अभिनव तरीके ने रंगमंच में उनकी अलग पहचान विकसित की और बादल सरकार रंग जगत का एक शीर्ष नाम बन गया। बादल दा ने गत 15 जुलाई को जीवन के 83 वर्ष पूर्ण किए हैं।
बादल सरकार से प्रेरित हो कर देश के सैकड़ों रंगकर्मी सड़कों पर नाटक करने उतरे और प्रतिरोध के लिए थिएटर को माध्यम बनाया। थिएटर आडोटोरियम और उसके तमाम तामझाम को छोड़ कर ‘सुधीन्द्र नाथ सरकार’ ने जब थिएटर को जनता से सीधे संवाद करने का माध्यम बना कर नुक्कड़ नाटक की अपनी शैली विकसित की, तो रंग जगत में एक तूफान सा आ गया। सन् 1970 के आसपास उन्होंने थिएटर आडोटोरियम से नुक्कड़ की यात्रा शुरू की। उस समय बांगला थिएटर जगत में शंभू मित्र, तृप्ति मित्र और उत्पल दत्त के नाम शीर्ष पर थे। बादल सरकार बताते हैं- ‘‘मैंने अपना काम कविताओं से शुरू किया। सन् 1956 में मैंने अपना पहला नाटक साल्यूशन एक्स लिखा। फिर सन् 1956 में बारो पिशीमा आया। अभी हाल ही में उनकी दो पुस्त…