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February, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

काफी हाउस

काफी हाउस
जबलपुर के पारम्परिक सिटी काफी हाउस ने भी अन्य शहरों के काफी हाउस की तरह अपना रंग रूप बदल लिया है। शायद कई लोगों को जानकारी न हो कि जबलपुर में इंडियन काफी हाउस का हेड क्वार्टर भी है। यहां के काफी हाउस में एसी लग गया है। लम्बे लम्बे पर्दे इसे एक्सक्लूसिव बना देते हैं। अब यहां किसी को मीटिंग या प्रेस काफ्रेंस की इजाजत नहीं है। ज्यादा देर बैठने पर वेटर पूछ लेता है। पहले जैसा अपनापन नहीं दिखता. इससे ही एक कविता काफी हाउस पर उपजती है।

यह क्या हो गया
काफी हाउस भी मजबूर हो गया
बड़े रेस्त्राओं से टक्कर लेने को
इसलिए उसमें बदलाव दिखने लगा
लम्बे लम्बे पर्दे दीवारों पर रंग बिरंगे रंग
जमीन पर कालीन
काफी के साथ अब कांटीनेंटल डिश भी तैयार है
काफी हाउस की फिल्टर काफी में रंग बदल से गए हैं
काफी की गरम कड़क में पहले जैसा स्वाद नहीं
और न ही काफी हाउस की टेबलों में पहले जैसे ठहाके।
हेल्पर से शुरु हुआ था कैरियर
जूनियर, सीनियर फिर अब मैनेजर
आंखें तलाश रहीं
वर्षों पहले की हंसी, खुलेपन, सेंट्रल टेबल की चर्चा,
छुट्टी के दिन छह महीने में निकलने वाले परिवार को
पहले यहां नजर आ जाते थे, प्रेम करने वाले,
संपूर्ण क्रांति के …

पहल 87

पहल का 87 वें नम्बर का अंक प्रकाशित हुआ। इस अंक की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह अंक सुप्रसिद्ध फिल्मकार माइकल एंजिलो एंतोनिओनी पर केन्द्रित है। अतः इसकी शुरुआत भी एंतोनिओनी के जीवन पर, उनकी शैलीगत विशेषताओं आदि पर लिखे गए विभिन्न लेखों से हुई है। नवम्बर-दिसम्बर 2007 के इस अंक में माइकल एंजिलो एंतोनिओनी के साथ साथ मराठी दलित कवियों के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर भुजंग मेश्राम एवं उर्दू साहित्य की जानी मानी लेखिका कुर्रतुलऎन हैदर के निधन पर लेख स्वरूप श्रद्धांजली अर्पित की गई है। इसके बाद नोम चोम्सकी के द्वारा अपनी पुस्तक ‘पतित राज्य:शक्ति का दुरुपयोग और लोकतंत्र को अघात’ के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र पर लगाए गए अभियोगो की पड़ताल कर उसका वैचारिक विश्लेषण दिया गया है। लम्बी कहानियों में कैलाशचन्द्र की डूब,स्याही के धब्बे, वंदना राग की यूटोपिया और पंखुरी सिन्हा की नयनतारा नयनतारा आमार प्रकाशित की गईं हैं। अन्य स्थायी स्तंभों के अलावा स्त्री-विमर्श के अंतर्गत डॉ. सुधा सिंह और रामचंद्र सरोज के पिछले दो अंकों में प्रकाशित लेखों के बाद इस बार राजीव मित्तल का एक उत्तेजक लेख प्रकाशित किया गया है जिसमें उन्…