सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पहल 87







पहल का 87 वें नम्बर का अंक प्रकाशित हुआ। इस अंक की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह अंक सुप्रसिद्ध फिल्मकार माइकल एंजिलो एंतोनिओनी पर केन्द्रित है। अतः इसकी शुरुआत भी एंतोनिओनी के जीवन पर, उनकी शैलीगत विशेषताओं आदि पर लिखे गए विभिन्न लेखों से हुई है। नवम्बर-दिसम्बर 2007 के इस अंक में माइकल एंजिलो एंतोनिओनी के साथ साथ मराठी दलित कवियों के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर भुजंग मेश्राम एवं उर्दू साहित्य की जानी मानी लेखिका कुर्रतुलऎन हैदर के निधन पर लेख स्वरूप श्रद्धांजली अर्पित की गई है। इसके बाद नोम चोम्सकी के द्वारा अपनी पुस्तक ‘पतित राज्य:शक्ति का दुरुपयोग और लोकतंत्र को अघात’ के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र पर लगाए गए अभियोगो की पड़ताल कर उसका वैचारिक विश्लेषण दिया गया है। लम्बी कहानियों में कैलाशचन्द्र की डूब,स्याही के धब्बे, वंदना राग की यूटोपिया और पंखुरी सिन्हा की नयनतारा नयनतारा आमार प्रकाशित की गईं हैं। अन्य स्थायी स्तंभों के अलावा स्त्री-विमर्श के अंतर्गत डॉ. सुधा सिंह और रामचंद्र सरोज के पिछले दो अंकों में प्रकाशित लेखों के बाद इस बार राजीव मित्तल का एक उत्तेजक लेख प्रकाशित किया गया है जिसमें उन्होंने हरिमोहन झा, तस्लीमा नसरीन और सआदत हसन मंटो के हवाले से न केवल वर्तमान बल्कि वैदिक काल से स्त्रियों की स्थिति एवं उस पर पुरुषप्रधान समाज द्वारा दी जा रही प्रताड़ना एवं उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार पर टिप्पणियां की गई हैं जिन्होंने स्त्री विमर्श को एक ऊंचाई प्रदान की है।
“इस बार पहल सम्मान 2007 की घोषणा नहीं की जा रही है। इसे अंतराल वर्ष के रूप में रखा जा रहा है। इस बीच इसके सभी शुभेच्छुओं के बीच अंतरंग चर्चा के उपरांत नए सिरे से निर्णय लिए जाएंगे।“

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विवेचना रंगमण्डल राष्ट्रीय नाट्य समारोह-2010: उत्कृष्ट रंगकर्म को दर्शकों का समर्थन

जबलपुर की विवेचना रंगमण्डल ने पिछले दिनों सात दिवसीय ‘रंग परसाई-2010 राष्ट्रीय नाट्य समारोह’ का आयोजन जबलपुर के मानस भवन में किया। यह नाट्य समारोह रंगकर्मी संजय खन्ना को समर्पित था। विवेचना की स्थापना वर्ष 1961 में हुई थी और संस्था ने 1975 से नुक्कड़ नाटकों के प्रदर्शन से अपनी रंग यात्रा की शुरूआत की, जो आज तक जारी है। देश में विवेचना रंगमण्डल की पहचान एक सक्रिय सरोकार से जुड़ी हुई रंगकर्म संस्था के रूप में है। विवेचना रंगमण्डल पिछले कुछ वर्षों से नए निर्देशकों की नाट्य प्रस्तुतियों को राष्ट्रीय समारोह में भी मौका दे रही है। इस बार के नाट्य समारोह में भी जबलपुर में आयोजित अंतर महाविद्यालयीन नाट्य प्रतियोगिता की तीन श्रेष्ठ नाट्य प्रस्तुतियों को मौका दिया गया, ताकि दर्शकों को नया रंगकर्म देखने का अवसर मिल सके। इस प्रयास को रंगकर्मियों के साथ-साथ दर्शकों ने भी सराहा। इस बार के नाट्य समारोह की एक खास बात यह भी रही कि दर्शकों को सात दिन में नौ नाटक देखने को मिले। समारोह की शुरूआत और अंत गंभीर और विचारोत्तेजक नाटकों से हुआ एवं अन्य दिन हास्य नाटकों के साथ नौटंकी भी देखने को मिली।
नाट्य समारो…

डा. संदीप जैन कैमराडिरी फोटोग्राफी काम्पीटिशन में अवार्ड आफ एक्सीलेंस से सम्मानित

बलपुर के सुप्रसिद्ध र्इएनटी चिकित्सक  डा. संदीप जैन को आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक http://www.cameraderie.co.in द्धारा आयोजित कैमराडिरी फोटोग्राफी काम्पीटिशन-2013 में अम्योचर (शौकिया) श्रेणी में उनकी फोटो प्रविष्टि लाइन्स आफ विजडम के लिए जूरी च्वाइस अवार्ड से सम्मानित किया गया है। पिछले दिनों मुंबर्इ में आयोजित एक भव्य समारोह में आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक की प्रबंध संचालक व सीर्इओ चंदा कोचर, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव सभरवाल और के. रामकुमार ने डा. संदीप जैन को सिल्वर अवार्ड आफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया। डा. संदीप जैन वेस्टर्न जोन में विजेता रहे और पुरस्कृत होने वाले छायाकारों में वे मध्यप्रदेश से एकमात्र छायाकार थे। डा. जैन की प्रविष्टि को जूरी ने 16 सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि में भी चयनित किया।
कैमराडिरी फोटोग्राफी काम्पीटिशन में देश भर से 8700 छायाकारों ने भाग लिया था और इसमें कुल 11,000 से ज्यादा फोटो प्रविष्टियां प्राप्त हुर्इ थीं। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छायाकारों को अपनी प्रविष्टि आन-लाइन प्रेषित करनी थी। प्रतियोगिता के निर्णायक ओग्लिवी एंड मेथर (ओएंडएम) एडवरटाइजिंग एजेंसी साउथ एशिया…

प्रतिरोध को थिएटर का माध्यम बनाने वाले रंगकर्मी बादल सरकार

बादल सरकार का नाम देश में नाटक का पर्याय है। कलकत्ता में जन्में बादल सरकार ने कई वर्ष इंजीनियर के रूप में काम किया। विदेश से रंगकर्म का डिप्लोमा लेने के पश्चात् उन्होंने रंग जगत में प्रवेश किया। उनके अभिनव तरीके ने रंगमंच में उनकी अलग पहचान विकसित की और बादल सरकार रंग जगत का एक शीर्ष नाम बन गया। बादल दा ने गत 15 जुलाई को जीवन के 83 वर्ष पूर्ण किए हैं।
बादल सरकार से प्रेरित हो कर देश के सैकड़ों रंगकर्मी सड़कों पर नाटक करने उतरे और प्रतिरोध के लिए थिएटर को माध्यम बनाया। थिएटर आडोटोरियम और उसके तमाम तामझाम को छोड़ कर ‘सुधीन्द्र नाथ सरकार’ ने जब थिएटर को जनता से सीधे संवाद करने का माध्यम बना कर नुक्कड़ नाटक की अपनी शैली विकसित की, तो रंग जगत में एक तूफान सा आ गया। सन् 1970 के आसपास उन्होंने थिएटर आडोटोरियम से नुक्कड़ की यात्रा शुरू की। उस समय बांगला थिएटर जगत में शंभू मित्र, तृप्ति मित्र और उत्पल दत्त के नाम शीर्ष पर थे। बादल सरकार बताते हैं- ‘‘मैंने अपना काम कविताओं से शुरू किया। सन् 1956 में मैंने अपना पहला नाटक साल्यूशन एक्स लिखा। फिर सन् 1956 में बारो पिशीमा आया। अभी हाल ही में उनकी दो पुस्त…